નારાણપર : नाराणपर : NARANPAR

: નારાણપર :
નારાણપર : नाराणपर : NARANPAR
તાલુકા : અબડાસા, જિલ્લા : કચ્છ ગુજરાત.
(વાયા : ડુમરા કચ્છ પીન : ૩૭૦૪૯૦)
આજ સોમવાર તારીખ ૮મી ઓક્ટોબર, ૨૦૧૨ના રોજ આ બ્લોગ બનાવેલ છે.
આ બ્લોગ ઉપર ગામનો ઈતીહાસ, માહીતી, શાળા, ગામની સંસ્થાઓ, પ્રવૃત્તીઓ, ગ્રામ પંચાયતની વીગતો, ઈત્તર પ્રવૃત્તીઓ અને ફોટાઓ મુકવામાં આવશે.
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Sunday, 7 December 2014

नाराणपुर जैन संघनी दरेक रसीदनी पाछळ दहेरासरजीनो थोडोक ईतिहास लखेल होय छे जेमां थोडीक वधारे माहिती नीचे प्रमाणे छे.


नाराणपुर जैन संघनी दरेक रसीदनी पाछळ दहेरासरजीनो थोडोक ईतिहास लखेल होय छे जेमां थोडीक वधारे माहिती नीचे प्रमाणे छे.

श्री विक्रम संवत 1921मां श्रे पार्श्वनाथ प्रभुने नाराणपुर गाममां पधराववामां आवेल अने त्यार बाद 31 वर्षे संवत 1952मां मागसर सुदि पांचमने गुरुवार एटले के तारीख 21.11.1895ना संघ तरफथी शिखरबद्ध जिनमंदिरनुं निर्माण करी पार्श्वप्रभु आदि जिनबिंबोने गादीनशीन करी प्रतिष्ठा थई हती. 

संवत 2009मां मागसर सुदि 11ने गुरुवार तारीख 27.11.1952 जिनालयनो जिर्णोद्धार करावी संघे चंद्रप्रभु स्वामीने मुळनायक तरीके बीराजमान करी पुनः प्रतिष्ठा करावे हती. एटले के संवत 2009 ई.स. 1952मां धजा महोत्सव उजवेल अने एने प्रथम धजा कहीए तो 02.12.2014ना दिवसे 62 + 1 =63मी धजा हती. 

शिखर बद्ध जिनमंदिरने 2014-1895 = 119 वरस थई गया अने 120मुं वरस चाले छे. 

आ जिनालयनो फरीथी जिर्णोद्धार करावी मंदिरना शिखरमां पार्श्वनाथ प्रभुने उच्च स्थाने बिराजमान करी संवत 2047ना द्धितिय वैशाख सुदि 13ने रविवार तारीख 26.05.1991ना पुनः प्रतिश्ठा करावी हती. 

मंदिरनो ध्वज दंड जे पहेलां लाकडानो हतो एने पछी धातुनो लगाडेल छे. तारीख 26.01.2001ना भुकंप वखते मंदिरने घणुं नुकशान थयेल.

पुजा पाठ नियमित चालु राखी चारे बाजुथी गामना ईजनेरो द्वारा आधुनिक पद्धतिथी समारकाम करेल. एटलेके श्रे रवि जैन, हेमंत वोरा, नविन वोरा, मनोज वोरा, वीके वोरा, रमेश काराणी वगेरेए मुलुन्ड, मांटुगा अने वीले पार्ला जैन संघो द्वारा मळेल आर्थिक मददथी मंदिरने नुतन जेवुं बनावेल छे. 

मंदिरना शिखरमां ध्वज दंड लगाडेल छे ए पत्थरने पहेलेथी नुकशान थयेल छे तथा हजी घणांनुं कहेवुं छे के ध्वज दंड बदलाववो जोईए. 

गामना ईजनेरो, सोमपुरा, ज्योतिषीओ, रुषी मुनीओ आचार्य वगेरेनो सहकार लई ध्वज दंड के शिखर पत्थरने नवीन बनावी शकाय. 

मंदिर उपर धजा बदलावती वखते कठोडो पहेलेथी न हतो ए कठोडो 2001ना भुकंप पछी रवीभाई जैन वगेरेनी मेहनतथी थयेल छे एटले हवे धजा सहेलाईथी बदलावी शकाय छे.